Tuesday, 4 August 2020

Naushad and Shakeel Badauni's pen continued all night


भोर के छह बजे जाकर कलमबद्ध हुआ था- प्यार किया तो डरना क्या... 

Bushra khan noori ... 

इधर के. आसिफ इसी कहानी पर फिल्म मुगल-ए-आजम बनाने की तैयारी कर रहे थे और उधर फिल्मिस्तान के बैनर तले अनारकली बनकर तैयार होने वाली थी। संगीतकार नौशाद अली जिन्हें  मुगले आजम के संगीत का जिम्मा मिला था। 
उन्होंने आसिफ से कहा था कि फिल्मिस्तान वाले आपसे जल्दी बना लेंगे। मुगले आजम और अनारकली एक ही कहानी है। आप सबजेक्ट बदल दीजिए। खामोख्वाह कंपीटीशन होगा। सब्जेक्ट तो बदलूंगा नहीं और आपको काम भी करना है। अपनी जिद के पक्के आसिफ ने दो टुक कह दिया था। नौशाद इसके बाद फिर कुछ न कह सके।

Naushad and Shakeel Badauni

अनारकली बनकर पहले रिलीज भी हो गई। फिल्म का गाना-  मौहब्बत में ऐस कदम डगमगाए, जमाना ये समझा कि हम पी के आए...सुपर हिट हो गया था।
नौशाद फिर बोले कि अकबर बैठा है, सलीम भी बैठा है, अनारकली आएगी और गाना होगा।
 आसिफ आपकी और अनाकरली की सिचुएशन एक ही जैसी है। या तो आप सिचुएशन बदलिए या गाने का आइडिया। मगर आसिफ का जवाब फिर वही था, सिचुएशन भी वही रहेगी और गाना भी वही होगा। इम्तिहान आपका है मेरा नहीं।
 मैं सेट ऐसा लगा रहा हूं जो आज तक लोगों ने देखा नहीं होगा।  वाकई उन्होंने देश और विदेशा न जाने कहां-कहां से टेक्निशियन बुलाकर लाजवाब शीश महल बनवाकर तैयार कर लिया था।
अब इम्तिाहन नौशाद और शकील बदायूंनी का बाकी था।  शकील फिल्म के गाने लिख रहे थे।  इस इम्तिहान में कामयाब होने के लिए एक दिन नौशाद और शकील शाम को छह बजे कमरा बंद करके बैठे, लिखते रहे, लिखते रहे। न जाने कितने मुखड़े लिख डाले। कितने बनाए, बिगाड़ दिए। फिर आखिर में गाना बनकर तैयार हुआ। प्यार किया तो डरना क्या...। दोनों ठंडी सास लेकर कमरे से बाहर निकले तो सुबह के छह बज रहे थे। सारी रात गुजर गई थी।
Pyar Kiya Toh Darna Kya...Pyaar Kiya Koi Chori Nahi Ki...
संगीतकार नौशाद ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि उस वक्त के गानों की उम्रों में वह रात भी शामिल होती होगी जो मैंने और शकील ने उस गाने को लिखने में गुजार दी थी।
 ये अपने-अपने क्षेत्रों के वे दिग्गज लोग थे जो हिंदी फिल्म जगत के रचे जा रहे इतिहास में कैमरे के पीछे रहकर खामोशी के साथ अपना काम कर रहे थे। या यों कहें खुद इतिहास बना रहे थे।

Dil Diya Hai Jaan Bhi Denge Aye Watan Tere Liye...

  हम जिएंगे और मरेंगे ए वतन तेरे लिए... Bushra चौतीस   साल पहले ऐसे ही अगस्त के महीने का एक दिन था। गीतकार आनंद बख्शी के घर कई लोग बैठे थे।...