Wednesday, 5 August 2020

The Magnum Opus Of Hindi Cinema


  05 अगस्त 1960 को प्रदर्शित हुई थी हिंदी सिनेमा की यह उत्कृष्ट कृति  


Bushra khan noori... 

'मैं हिदुस्तान हूं । हिमायला मेरी सरहदों का निगहबान है। गंगा मेरी पवित्रता की सौगंध। तारीख की इब्तिदा से मैं अंधेरों और उजालों का साथी हूं। और मेरी खाक पर संगेमरमर में लिपटी हुई ये इमारतें दुनिया से कह रही हैं जालिमों ने मुझे लूटा और मेहबानों ने मुझे संवारा। नादानों ने मुझे जंजीरें पहना दीं। और मेरे चाहने वालों ने उन्हें काट फेंका। मेरे इन चाहने वालों में एक इंसान का नाम जलालुददीन मोहम्मद अकबर था। अकबर ने मुझसे प्यार किया। मजहब और रस्मों रिवायत की दीवार से बलंद होकर इंसान को इंसान से मौहब्बत करना सिखाया। और हमेशा के लिए मुझे सीने से लगा लिया...' हिंदुस्तान की जुबां से निकली इन चंद  बातों के  साथ शुरू होती है फिल्म मुगले आजम। 


अपने बनने के 44  साल बाद साल 2004  में जब मुगले आजम को कलर किया गया तो एक बार फिर यह थियेटर में प्रदर्शित हुई । यह पहली ऐसी फिल्म थी जिसे रंगीन करने के बाद दोबारा प्रदर्शित किया गया था। जिसे देखने के लिए उस दौर की उम्र वाले ही नहीं जवान पीढ़ी भी कम जोश में नहीं थी।

 जब पत्रकार राजकुमार केसवानी इस फिल्म की गहराइयों में उतरते हैं तो इसके बनने  के 60 साल बाद निकाल लाते हैं 'दास्तान-ए- मुगले आजम' की शक्ल में एक बेशकीमती किताब। 

photo credit: keswani ji ka facebook account


जिसकी शुरूआत कुछ यों होती है-
 '1922 में एक साथ दो घटनाएं हुईं जिनका जाहिरा तौर पर एक-दूसरे से कोई ताल्लुक नजर नहीं आता था। एक तरफ लाहौर में बैठे एक ड्रामानिगार  इम्तियाज अली 'ताज' ने एक नाटक लिखा 'अनारकली' तो दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में 14  जून 1922 को डॉक्टर फजल करीम और बीबी गुलाम फातिमा के घर एक बच्चे का जन्म हुआ। नाम रखा गया करीमुददीन आसिफ। पूरे 22 साल बाद जाकर इन दो घटनाओं के बीच का रिश्ता उस वक्त उजागर हुआ जब करीमुददीन आसिफ जो उस वक्त तक बम्बई पहुंचकर के. आसिफ बन चुका था, ने अनाकरली की कहानी सुनी और उसे अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया।'  इस किताब को जरूर पढ़ना चाहिए जिसमे कई गुमनाम किस्से बयां हुए हैं । 

Whose invaluable contribution was behind the scenes

 निर्देशक आसिफ और न जाने कितने लोगों की मेहनत के सिर पर इसकी  कामयाबी का ताज।

स्क्रीन प्ले- के. आसिफ और अमानउल्लाह खान, डायलॉग्स-अमानउल्लाहखान, कमाल अमरोही, एहसान रिजवी, वजाहत मिर्जा। संगीत- नौशाद, सिनेमैटोग्राफी- आर डी माधुर, फिल्म एडिटिंग- धर्मवीर, आर्ट डायरेेक्शन-एम के सैय्यद, अब्दुल हमिद- मेकअप आर्टिस्ट, पी जी जोशी- मेकअप आर्टिस्ट आर पितांबरअसिसटेंट मेकअप आर्टिस्ट, टी राजाराम- असिसटेंट मेकअप आर्टिस्ट, मदन चोपड़ा ... असिसटेंट प्रोड्क्शन मैनेजर, एसवी कोरेगांवकर ... असिसटेंट प्रोड्क्शन मैनेजर, सुल्तान मोहम्मद ... असिसटेंट प्रोड्क्शन मैनेजर, असलम नूरी ... प्रोडक्शन मैनेजर, लक्ष्मण सिंह ...असिसटेंट प्रोडक्शन मैनेजर, सेकैंड यूनिट डायरेटर या असिसटेंट डायरेक्टर, राशिद अब्बासी ... सहायक निर्देशक, खालिद अख्तर ... मुख्य सहायक निदेशक, एमडी अनवर ... सहायक निदेशक, रफीक अरबी ... सहायक निर्देशक, सुरिंदर कपूर ... सहायक निर्देशक, के मनोहर ... सहायक निर्देशक, एच ए रियाज ... सहायक निर्देशक,

 एसटी जैदी ... एसोसिएट डायरेक्टर, सैयद इमाम ...असिसटेंट सेटिंग्स, बी.आर. खेडकर ... चीफ मोल्डर, शैक लाल ... असिसटेंट सेटिंग्स, एलडी लिंगायत ... पेंटर असिसटेंट , एच जे महात्रे ...पेंटर असिसटेंट , एडम मिस्त्री ... असिसटेंट सेटिंग्स (स्वर्गीय एडम मिस्त्री के रूप में), आगा जानी शिराज़ी ... कांच की कलाकृति, शीश महल , एस.पी. वर्लीकर ... मुख्य चित्रकार, शेख अकरम ...

 डायरेक्टर ऑफ साउंड, रंजीत बिसवास ... साउंड असिसटेंट, .जी. मेहता ... साउंड असिस्टेंट, हसन राजे ...साउंड असिस्टेंट, बद्री नाथ शर्मा ... साउंड मिक्सर, शल इफेक्ट्स-अंसारी ... मुख्य शीर्षक, एस. अजीम ... फाइटिंग इंस्ट्रक्टर, तलवार , मास्टर रोशन ... फाइटिंग इंस्ट्रक्टर, तलवार , कैमरा और इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट, एमडी अयूब ... अतिरिक्त कैमरा ऑपरेटर, लड़ाई के दृश्य / सहायक कैमरा, चंदू ... स्टिल फोटोग्राफर, के. गोपालराव ... सहायक कैमरा / मुख्य इलेक्ट्रीशियन, केरवद्ग ... अतिरिक्त कैमरा ऑपरेटर, लड़ाई के दृश्य, शफ़ान मिर्ज़ा ... अतिरिक्त कैमरा ऑपरेटर, युद्ध के दृश्य / सहायक कैमरा, एम.के. मुकददम ... अतिरिक्त कैमरा ऑपरेटर, युद्ध के दृश्य, ए. एल सैयद ... आउटडोर स्टिल फोटोग्राफर, एम.के. सैयद ... आउटडोर स्टिल फोटोग्राफर, जग्गी ... वेशभूषा, कॉस्टयूम, हबीब मिर्जा ... कढ़ाई, एमब्रायडरी , बीएन त्रिवेदी ... वॉर्डरोब इंचार्ज, एडिटोरियल डिपार्टमेंट, सत्ते सिंह रावत ... असिसटेंट एडिटर यानी सहायक संपादक, एमडी शाहिद ... सहायक संपादक, प्रभाकर सुपारे ... सहायक संपादक (पी। जी। सुपारे के रूप में), गुलाम अली खान ... पार्श्व गायक, शकील बदायुनी ... गीतकार, शमशाद बेगम ... पार्श्व गायक , रॉबिन चटर्जी ... गीत रिकार्डर , मोहम्मद इब्राहिम ... संगीत सहायक , कौशिक ... सॉंग रिकॉडिस्ट, लता मंगेशकर ... पार्श्व गायक, मोहम्मद रफी ... पार्श्व गायक,मोहम्मद शफी ... म्यूजिक असिसटेंट,नूरजहां ... प्लेबैक सिंगर,रमा देवी ... नृत्य सहायक, लक्ष्मी ... नृत्य सहायक,लच्छू महाराज ... नृत्य निर्देशक, हाजी शम्सुद्दीन ... जूनियर आर्टिस्ट सप्लायर , धन्यवाद-सेठ बद्रीप्रसाद दूबे ... आभार- देविका रानी ... आभार-अभिमन्यु सिंह ...  फिल्म शामिल हाथी-घोड़ों का भी मेरी तरफ से आभार . 

Dil Diya Hai Jaan Bhi Denge Aye Watan Tere Liye...

  हम जिएंगे और मरेंगे ए वतन तेरे लिए... Bushra चौतीस   साल पहले ऐसे ही अगस्त के महीने का एक दिन था। गीतकार आनंद बख्शी के घर कई लोग बैठे थे।...