चौतीससालपहले ऐसे ही अगस्त के महीने का एक दिन था। गीतकार आनंद बख्शी के घर कई लोग बैठे थे। निर्माता-निर्देशक सुभाष घई आनंद को गाने की सिचुएशन बता चुके थे। गाने की चंद लाइनें लिख कर आंनद ने उन्हें सुनाईं। सुनकर सुभाष एकदम भावुक हो गए। उन्होंने खुश होकर जेब से सौ रुपए का नोट निकाला।
उस पर उस दिन की तरीख और अपना नाम दर्ज किया और आनंद के हाथ में थमा दिया। सुभाष घई दिलीप कुमार, नूतन, नसीरुद्दीन शाह, श्रीदेवी,अनुपम खेर, अनिल कपूर, जैकी श्राफ आदि को लेकर एक फिल्म बना रहे थे 'कर्मा'।
फिल्म बनकर तैयार हुई। 8 अगस्त 1986 को सिनेमाघरों में कर्मा के रिलीज होने के बाद तो मानो लोग देशप्रेम की बौछारों से सराबारे हो गए ।
आनंद बख्शी का रचा वह गीत 'हर करम अपना करेंगे ऐ वतन तेरे लिए, दिल दिया है जां भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए...' आज 36 साल बाद भी हम सब सुन रहे हैं। मानो यह गीत अमर हो गया हो । कर्मा सुपरहिट थी, उतने ही लोकप्रिय थे फिल्म के गीत। इन गीतों को संगीत दिया था संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने। आनंद बख्शी के दुनियॉ के चले जाने के बाद उनके बेटे को वह नोट पिता के बटुए के एक कोने में दुबका मिला। जिस पर तरीख लिखी थी 3 अगस्त 1984 और साथ में एक नाम लिखा था सुभाष घई।