Sunday, 2 August 2020

Mughal-e-Azam is completing 60 years


... तब जाकर बनती है एक मुग़ल-ए-आज़म  

-Bushra Khan Noori ...


छह दशक पहले इतिहास परदे पर ऐसा उतरा कि खुद इतिहास बन गया। भारतीय सिनेमा का यह ऐतिहासिक कोहिनूर  'मुगले आजम' 5 अगस्त 2020 को साठ बरस की होने को जा रही है। निर्देशक के. आसिफ के अलावा सैकड़ों लोगों की मेहनत और सब्र फिल्म के जर्रे-जर्रे में पिरा हुआ है।

➤  मेरा दिल भी कोई आपका हिंदुस्तान नहीं, जिस पर आप हुकूमत करें।


आज सिर्फ बात उन की जिनकी कलम से निकला एक-एक डायलॉग लोगों के दिल-ओ-दिमाग पर नक्श हो गया। शुरू से आखिर तक ऐसे-ऐसे संवाद हैं जो अमर हो गए। इन्हें लिखने वाले थे अमानउल्लहा खान, कमाल अमरोही,  एहसान रिजवी और वजाहत मिर्जा।
 कुछ यादगार संवाद:

➤ इंसाफ हमें बेटे से ज्यादा अजीज है- शहंशाह अकबर।

➤  हमारा हिंदुस्तान कोई तुम्हारा दिल नहीं कि एक लौंडी जिसकी मलिका बने-महारानी जोधा।

➤  बेहिसाब बख्शिशों के लिए यह कनीज शहंशाह जलालुद्दीन बादशाह अकबर को अपना खून माफ करती है- अनारकली।

➤ संसार में शायद तू पहली तलवार है जिसे मां सीने से लगाया है


➤  वो जानते हैं कि इस वक्त मेरे दिल को मरहम की जरूरत थी फिर भी उन्होंने मेरे लिए नशतर भेजा- शहजादा सलीम।

➤  राजपूत जान हारता है,वचन नहीं- दुर्जन सिंह।

➤  तुम अपनी मौहब्बत की आग में मुगलों के ताज पिघलाकर एक रक्कासा के पैरों की पाजेब बनाना चाहते हो-अकबर।

➤  बाखूदा हम मौहब्बत के दुशमन नहीं, अपने उसूलों के गुलाम हैं-अबकर।

➤  यह है मैदाने जंग लाखों बेगुनाह इंसानों का खून और एक इंसान की फतेह-संगतराश।

➤   सुहाग की लाली मेरे माथे से मिटा तो दी लेकिन अब आपको सलीम से खून से ये लाली लागनी होगी।

➤ अगर ऐसा नहीं हुआ तो सलीम तुझे मरने नहीं देगा

 और हम अनारकली तुझे जीने नहीं देंगे


➤  सुहाग की कीमत अगर औलाद का खून है तो लीजिए ये तलवार और बड़ी खुशी से मेरे बच्चे को कत्ल कर दीजिए। मैं उफ तक न करुंगी- जोधा।

➤  इन हाथों से अकबरे आजम की तलवार क्या उठेगी जो अपने सुहाग की चूडिय़ों का बोझ तक नहीं उठा सकतीं- अकबर।

➤  जब्त मैं करूं जिसकी दुनियॉ विरान कर दी गई हो और जब्त वो न करें जिन के सिर्फ शोक-ए- बादशाहत को ठेंस लगी। यह तुम्हारे महाबली की बादशाहत नहीं खुदाई है -सलीम।

➤  खुद्दार मुगलों की आबरू इतनी हल्की नहीं कि एक नाचीज लौंडी के बराबर तुल जाए-जोधा।

➤  आपनी औलाद को अपना बनाने के लिए हमें एक कनीज का एहसास उठाना होगा-अकबर ।

➤  शहंशाह बाप का भेष बदलकर आया है-सलीम।

➤  शहंशाहों के इंसाफ और जुल्म में 

किस कद्र कम फर्क होता है


➤  हमारी दुआ है कि मैदाने जंग में खुदा तुम्हें जलाल-ए-अकबरी से महफूज रखे- अकबर।

➤  तुम हिंदुस्तान के मुक़द्दस तख्त पर एक हसीन लौंडी को नचाना चाहते हो-अकबर।

➤  मान सिंह! लो हम आज मुगलों का मुस्तकबिल तुम्हारे हवाले करते हैं- अकबर।

➤  अगर खय्याम की रुबाई सुनहरे वर्क की बजाए पथरीली जमीन पर लिख दी जाए तो क्या उसके मायने बदल जाएंगे- सलीम।

...


                                                       

                                                                      






Dil Diya Hai Jaan Bhi Denge Aye Watan Tere Liye...

  हम जिएंगे और मरेंगे ए वतन तेरे लिए... Bushra चौतीस   साल पहले ऐसे ही अगस्त के महीने का एक दिन था। गीतकार आनंद बख्शी के घर कई लोग बैठे थे।...