Tuesday, 10 December 2019

 

                 पंढेरी दादा: जिन्होंने सजाए अनगिनत सिनेमाई चेहरे


- बुशरा खान नूरी ... 


पंढेरी दादा के नाम से मशहूर थे वे। जाने-माने निर्माता-निर्देशक-एक्टर वी. शांताराम के  मेकअप से शुरू हुई कहानी ने फिर साठ वर्षों का सफर तय किया। यह खूबसूरत सफर है लेजेंडरी मेकअप आर्टिस्ट पंढेरी जुकर का। दुनियॉ जिन हिंदी सिनेमा के चेहरों की दीवानी रही उन पर पंढेरी की ही अंगुलियों का जादू था।

      मीना कुमारी, नर्गिस, नूतन, वहिदा रहमान, मधुबाला, शर्मिला टैगोर से लेकर श्रीदेवी, जूही चावला, माधूरी दीक्षित, सोहा अली खान, करीना कपूर, ऐश्वया राय तक। दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन, धमेंद्र, रहमान, सुनील दत्त, प्रदीप कुमार, नवाब पटौती, अजीत, राजकुमार से लेकर शाहरुख खान, सनी देओल, संजय दत्त, सैफ अली खान जैसे अनगिनत चेहरे उनके हाथों से होकर गुजरें हैं।  सिनेमा की तीन पीढिय़ों का मेकअप उन्होंने किया है। गोल्डन ऐरा का शायद ही कोई कलाकार बचा हो जिसका मेकअप पंढेरी ने न किया हो। कलाकार भी उन्हें सिर आंखों पर रखते थे। इसमें दिलीप कुमार का नाम सबसे ऊपर है। 

     पंढेरी को पेंटिंग और फोटोग्राफी का शौक था। वे एक कमर्शियल आर्टिस्ट बनना चाहते थे। मगर पिता के बीमार होने पर उन्हें बेइरादन इस क्षेत्र में आना पड़ा। 1948 में ब्लैक एंड व्हाइट से शुरू हुआ यह सिलसिला रंगीन फिल्मों तक जारी रहा। 

     शांतराम को उनका काम पसंद आया था कि पंढेरी को अपनी फिल्म कंपनी में 70 रुपए महीना नौकरी दे दी। उस जमाने में यह सैलरी बहुत ज्यादा थी। पंढेरी को इस क्षेत्र में लाने का श्रेय उनके गुरु बाबा वर्धम को जाता है। बाबा फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर मेकअप मैन थे। किस्सा कुछ यों हुआ कि एक दिन बाबा को एक असिसटेंट की जरुरत पड़ी। यहीं से पंढेरी का सफर शुरू हुआ। उन्होंने पहले छह साल बतौर असिसटेंट काम किया। 

उस जमाने की सुपरस्टार नर्गिस एक रशियन फिल्म 'परदेसी' कर रही थीं। नर्गिस ने निर्देशक को पंढेरी के नाम की सिफारिश की। वे चाहती थीं कि यह मौका किसी रशियन को नहीं, भारतीय को मिले। नर्गिस की सिफारिश पर पंढेरी को 500 रुपए माह पर नौकरी मिल गई। इसी फिल्म के चलते उन्हें रशिया जाने का मौका मिला। रशिया में पंढेरी ने मेकअप आर्ट में डिप्लोमा किया। 

    बीआर चोपड़ा 'कानून' फिल्म बना रहे थे । फिल्म में एक एक्टर नाना पलसिकर ने अपनी भूमिका के लिए असली दाढ़ी बढ़ाई थी। मगर रीटेक की जरुरत पड़ गई। पंढेरी ने मेकअप से वैसी ही दाढ़ी बना दी। फिर क्या था बीआर के यहां 250 रुपए माह पर उन्हें काम मिल गया। यहां उन्होंने वक्त, गुमराह, हमराज आदि ढेरों फिल्में कीं। यहां उन्होंने 42 साल तक काम किया। इसकी बैनर की आखिरी फिल्म उन्होंने मोहब्बतें कीं। झनक झनक पायल बाजे, चित्रलेखा, नूरजहां, नीलकमल, रेशमा शेरा, ताजमहल, सात हिंदुस्तानी, मोहरा और दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे जैसी हजारों फिल्मों के कलाकारों को पंढेरी ने यादगार चेहरे दिए। अपनी मेकअप अकादमी में उन्होंने सैकड़ों युवक-युवतियों को मेकअप के गुण सिखाए। 

वी. शांताराम पुरस्कार मिलने पर उन्होंने मन का दर्द बयां किया था। उन्हें इस बात का अफसोस था कि हम टेक्निशियन लोगों को कोई अवार्ड दिया नहीं जाता। कोई पूछता भी नहीं है कि मेकअप आर्टिस्ट कौन है।  इसी साल फरवरी में पंढेरी दादा का 88 साल की उम्र में निधन हो गया। शोक व्यक्त करने वालों में फिल्म जगत के गिने-चुने लोग ही थे।  अमिताभ बच्चन ने उन्हें श्रद्धांजलि  दी- 'उन्होंने हजारों चेहरों को छूकर उसकी खूबसूरती ही नहीं बढाई बल्कि हजारों दिलों को भी छुआ है।'   परदे के पीछे रहकर योगदान देने वाले इस अनमोल कलाकार को हमारा नमन!

पंढेरी दादा की सीख

मेकअप करना आर्ट है।  मेकअप आर्टिस्ट को पेंटिंग, स्कल्प्चर, लाइटिंग, विग और हेयर मेकिंग की जानकारी होनी चाहिए।    

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