Friday, 29 December 2017

..और पीछे छूटते माँ बाप.



..और पीछे छूटते माँ बाप 

बुशरा खान नूरी..


' मां जन्नत है तो पिता उस जन्नत का दरवाजा।' कहावत अब जर्जर और बेमतलब सी हो चली है.  बिल्कुल बूढे़, कमजोर और आउटडेटेड से हो चले मां बाप की तरह। जिसे पढ़ने वाले सरसरी निगाह से पढ़ते हैं और भूल जाते हैं। वैसे जैसे संवेदनहीन बच्चे बड़े होने पर अपने मातापिता को पुरानी हो चली वस्तु की तरह त्याग कर घर से बाहर खड़ा कर देते हैं। बिल्कुल अकेला, असहाय। 
कड़वा, लेकिन सौ आने सच है कि एक पिता अकेले अपने 5 बच्चों का पेट पाल सकता है, लेकिन पांच बच्चे मिलकर अपने बाप को 2 वक्त की रोटी नहीं खिला सकते।  मां बाप से दूरी बना लेना बच्चों  के लिए फैशन सा हो चला है। एकल परिवारों (Single families) का फैशन जो खूब चलन में बना हुआ है। 




2 comments:

Dil Diya Hai Jaan Bhi Denge Aye Watan Tere Liye...

  हम जिएंगे और मरेंगे ए वतन तेरे लिए... Bushra चौतीस   साल पहले ऐसे ही अगस्त के महीने का एक दिन था। गीतकार आनंद बख्शी के घर कई लोग बैठे थे।...